Monday, June 7, 2010

AAL....IZ...WELL!!!

Optimism की हवा चली है
जैसे बिमारी गयी हो फैल
जिसे भी मिलो कह उठता है
AAL..... IZ...... WELL !!

बीच सडक पर कडी धूप में थक चुका था बंदा
गन्ने का रस निचोड निचोडकर चला रहा था धंदा
मैनें पूछा “कैसे हो भैय्या? दिखते हो कोलू का बैल!”
पसीना पोछ कर हाँफ पडा वो
“AAL..... IZ...... WELL !!”

इम्तिहानोंसे बेहाल होकर गिर पडी एक छात्रा
झटपट students ले गये उसकी हस्पताल तक यात्रा
एक हाथ में saline लगा था, दूजे में था cell,
पर मुझे देखते चहक उठी वो
“AAL..... IZ...... WELL !!”

पडोस का couple लढ पडा था, घर में खामोश दोनों
‘Mercedes पे किसका हक था किसके लिए थी Nano!’
दोनों का था ego मोटा, पर जब बजती doorbell,
हँसकर दोनों कुछ यूँ जताते
“AAL..... IZ...... WELL !!”

दादीमाँ का बढा था BP, पोते का result था आना
साल भर की खाक पढाई, ज्यादा गाना बजाना
Tension में अब पोते को वो कर रही थी ‘yell’
निर्लज पोता style में बोला
“AAL..... IZ...... WELL !!”

महंगाई से बेबस होकर चीख रही थी जनता
दुकानदार के डरी शकल पर नाच रही थी चिंता
बेचारे से अब ना कोई shampoo खरीदें ना gel,
पर shutter पे पोस्टर लगा रखा था
“AAL..... IZ...... WELL !!”

देश में हिंसा, नौकरी की चिंता, चारों ओर है दहशत
ऐसे में फिर मंत्री खाएँ हर मौके पर रिशवत
इनपे भी जब होगा हमला, जाएँ वो heaven या hell
देश लगाएगा खुशी से नारा
“AAL..... IZ...... WELL !!”

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